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अभी कुछ दिन पूर्व अखबार मे एक खबर पढ़ कर दिल ओ दिमाग मे एक प्रकार का क्रोध सा है 1 ख़बर् इस प्रकार थी कि एक व्यक्ति ने 7 साल कि मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म किया 1 दिल कांप जाता है यह सोच कर कि उस मासूम पर क्या गुजरी होगी ? क्या हमारे समाज मे कुछ लोगो का चरित्र इतना गिर गया है? क्या हवस मे आदमी इतना अंधा हो जाता है कि उसको सही गलत का ही पता नही रहता? मेरे दिल मे एक सवाल उठता है कि जो उम्र उन मासूमो का आत्मविश्वास बढ़ने कि होती है, जो उम्र उनके कुछ सीखने कि होती है और जिस उम्र मे वो दुनिया मे चलना सीखना चाहता है उस उम्र मे वो इस प्रकार कि दरिंदगी का शिकार होकर अपना आत्मविश्वास खो देता है उनकी मासूमियत कंही दफ़न हो जाती है1 जिन्हे हम अपने देश का भविष्य समझते है, जिनसे हमको , देश को बहुत उम्मीद होती है क्या वो उन उम्मीदो पर खरे उतरेंगे उत्तर होगा शायद नही.......1 दरिंदगी के शिकार बच्चे को एक खास देखभाल कि जरूरत होती है, प्यार दुलार मिलना चाहिए लेकिन हमारी सामाजिक व्यवस्था कुछ एसी है है कि वो उन मासूमो को कुछ भूलने नही देती है उन्हे बेचारा बना देती है 1 और शायद यही कारण है कि कुछ समझदार बच्चे आत्महत्या तक करलेते है 1 इन सब से उपर एक सवाल यह है कि इस प्रकार कि दरिंदगी को अंजाम देने वालो के दिलो मे हमारी कानून व्यवस्था का कोई डर नही है क्यो........1शायद इसके दो कारण है , पहला कुछ कानून के रखवाले भी इस प्रकार का जुर्म करते है और दूसरा सबसे बड़ा कारण हमारी कानून व्यवस्था का है जिसमे इस प्रकार कि दरिंदगी के लिए कोई कड़ा कानून नही है बस कुछ साल की सजा और कुछ जुर्माना .... फिर आज़ाद..... कितना दुर्भाग्य है...... कि हम अपने नोनिहलो को कोई सुरक्षित बचपन नही दे पा रहे है 1 जिस देश मे बच्चे सुरक्षित नही उस देश का भविष्य क्या होगा ...............? इस प्रकार की दरिंदगी के लिए कानून को बहुत कड़ा करना होगा , इस प्रकार के जुर्म करने वालो को एसी कठोरतम सजा का प्रावधान होना चाहिए कि कोई भी इस प्रकार का जुर्म करने की जरूरत ही ना करे 1
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