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Friday 29 August, 2008
 11:38 | 13/Jul/2008 |  2 Comment(s)
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निष्ठा सम्पदा है
जीने का अंदाज़ ..................... श्री श्री रवि शंकर जी (आध्यात्मिक गुरु)
यदि तुम सोचते हो कि ईश्वर मे तुम्हारी निष्ठा ईश्वर का कुछ हित कर रही है, तो यह तुम्हारी भूल है 1 ईश्वर या गुरु मे तुम्हारी निष्ठा
ईश्वर या गुरु का कुछ नही करती1 निष्ठा तुम्हारी सम्पदा है 1 निष्ठा तुम्हे तुरंत बल देती है 1 निष्ठा तुममे स्थिरता, केन्द्रिता,
प्रशांति और प्रेम लाती है 1 निष्ठा तुम्हारे लिए आशीर्वाद है, तुममे संपूर्णता लाती है 1 यदि तुममे निष्ठा का अभाव है, तुम्हे
इसके लिए प्रार्थना करनी होगी 1 परन्तु प्रार्थना के लिए निष्ठा आवश्यक है 1 यह विरोधाभासी है 1 लोग संसार मे निष्ठा
रखते है परन्तु ये पूरा संसार साबुन का बुलबुला है 1 लोगो की स्वयं मे निष्ठा है परन्तु वे जानते नही कि वे स्वयं कौन है 1 लोग
सोचते है की ईश्वर मे उनकी निष्ठा है परन्तु वे सचमुच नही जानते ईश्वर कौन है 1 जिसकी तुम्हे आवश्यकता है, वह तुम्हे मिलता ही है
यह समझ लेना ही निष्ठा है - ईश्वर को कुछ कार्य करने का अवसर देना 1
निष्ठा तीन प्रकार की होती है:-

स्वयं मे निष्ठा:- स्वयं मे निष्ठा के बिना तुम ये सोचते हो की मे ये नही कर सकता, मैं कभी जिंदगी से मुक्त नही हो सकता 1

संसार मे निष्ठा:- संसार मे तुम्हे निष्ठा रखनी ही होगी वरना तुम एक इंच भी नही बढ़ सकते 1

ईश्वर मे निष्ठा:- ईश्वर मे निष्ठा रखो तभी तुम्हारा विकास होगा 1

ये सभी निष्ठा आपस मे जुड़ी है , प्रत्येक को मजबूत होने के लिए तुममे तीनो ही होनी चाहिए 1 तुम एक पर भी शक करोगे , तो
सब पर शक होगा 1

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